आगर मालवा- छिंदवाड़ा में कोल्डरीफ कफ सीरप पीने से मासूम 19 बच्चों की मौत हो जाने से पुरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुवा है. इसी कढ़ी में जिला प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग का अमला भी सतर्क हो गया है. मंगलवार को एसडीएम मिलिंद ढोके, तहसीलदार विजय सेनानी, सीएमएचओ दिनेश दहलवार सहित स्वास्थ्य विभाग का अमला धरातल पर उतरा और मेडिकल एजेंसी व मेडिकल स्टोर दुकानों पर जांच के लिए पंहुचे. सबसे पहले टीम बड़ोद मार्ग स्थित एक मेडिकल एजेंसी पर पंहुचे जहा सभी अधिकारियो सहित ड्रग इंस्पेक्टर रौशनी ने प्रतिबंधित सीरप के विषय में एजेंसी संचालक से जानकारी ली हालांकि काफ़ी दवाइयां की जाँच करने के बाद यहां किसी प्रकार की प्रतिबंधित दवाइयां नहीं मिली इसके बाद टीम इसी मार्ग पर एक ओर मेडिकल स्टोर पर पंहुची यहाँ पर भी प्रतिबंधित दवाइयों की पड़ताल की गई लेकिन यहाँ भी कुछ नहीं मिला. इस मामले में एसडीएम मिलिंद ढोके ने बताया की अभी कुछ दिन पहले छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में कुछ बच्चों के लिए ऐसे सिरप थे, जिसमें कोई ऐसी मात्रा अधिक पाई गई थी, जिसके कारण कई बच्चे मृत भी हुए थे। उसी विषय को लेकर शासन ने आदेश जारी किए थे और पूर्व से भी ये सारी कार्रवाई चल रही है, जांच की। इसी तारतम्य में आज सारे मेडिकल स्टोर्स वगैरह देखने आए थे कि उस टाइप का कोई कोरेक्स से रिलेटेड या फिर जो बच्चों का जो सिरप रहता है, उसमें वो वाली ज्यादा क्वांटिटी तो नहीं है। इस टाइप के जांच के उद्देश्य से सारी टीम आई थी, सीएमएचओ और ड्रग इंस्पेक्टर, तहसीलदार हम सभी लोग साथ थे। जिले के मेडिकल चेक करने की कार्रवाई पहले से चल रही है और अभी जितने भी मेडिकल है वहा जाँच कराई जाएगी और ग्रामीण क्षेत्र में भी देखा जाएगा कहीं कोई इस टाइप का मेडिसिन या सिरप कोई विक्रय तो नहीं कर रहा है।ज़ब इस सम्बन्ध में ड्रग इंस्पेक्टर रौशनी से बात की गई तो उन्होंने बताया की फ्रीज टीआर का जो मेरे पास लेजर भोपाल से शेयर किया गया था कि कहाँ-कहाँ ये स्टॉक डिस्ट्रीब्यूट हुआ है पूरे ऑल ओवर मध्य प्रदेश में। तो उसकी एक एजेंसी हमारे यहाँ जो डीलरशिप ली है उनकी, तो वो अंशुला एजेंसी जो कोटा रोड में एक फ़र्म है, उनके पास इसका डीलरशिप थी। तो कल रात में ही मैं वहा गई थी मेरे द्वारा वहा निरीक्षण किया गया। जो स्टॉक आया था, उसे हैंड टू हैंड हमने डीटीसी कूरियर के माध्यम से तुरंत हमने परचेस रिटर्न चालान बनाकर उसी वक्त उसे वापस करवा दिया। तो आज के समय में अंशुला एजेंसी का जो स्टॉक है वो निल है। वो अब आज के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए उसके पास है नहीं। हमने तुरंत ही कल फ़र्म के जो प्रोपराइटर हैं, उनके साथ मिलकर ये तुरंत वापस करवा दिया था। क्योंकि उनके पास क्या कंपनी से रिकॉल लेटर आया था। कंपनी की एक पॉलिसी होती है कि अगर कोई दवाई एनएसक्यू साबित होती है (अवमानक), तो वो कंपनी अपनी जहाँ-जहाँ उन्हें डिस्ट्रीब्यूट करा है वहाँ से वो रिकॉल करती है। तो उनके पास क्या रिकॉल का लेटर आ चुका था, जिसके बिहाफ में वो पूरा का पूरा जो बैच आया था हमारे पास ये जो एनएसक्यू बैच था, डीटीसी कूरियर के माध्यम से वो जिले से बाहर जा चूका है.
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की घटना के बाद जागा प्रशासन, मेडिकल दुकानों पर जाँच के लिए पंहुचे एसडीएम सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी…

