अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता और बेखबर रवैये ने आगर शहरवासियों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई कई मौतों की दर्दनाक घटना के बाद भी आगर नगर पालिका ने कोई ठोस सबक नहीं लिया। हालात यह हैं कि शहर के कई इलाकों में पेयजल की मुख्य पाइपलाइनें खुले गंदे नालों और कीचड़ से होकर गुजर रही हैं, जिनके ऊपर मलबा तक डाला गया है।
शहर में पानी की टंकियों तक पानी पहुंचाने के लिए बिछाई गई बड़ी पाइपलाइनें कई स्थानों पर पूरी तरह गंदे नालों में दबी हुई नजर आती हैं। यदि इन पाइपलाइनों में कहीं भी लीकेज हुआ, तो नाले का दूषित पानी सीधे पेयजल में मिल सकता है, जो गंभीर बीमारियों व जानलेवा हालात पैदा कर सकता है।
इंदौर में दूषित पानी से करीब 14 लोगों की मौत के बाद भी आगर नगर पालिका का इस दिशा में आंख मूंदे रहना समझ से परे है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ भी है।
जब इस गंभीर मुद्दे पर कलेक्टर प्रीति यादव से चर्चा की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि,
“यह अत्यंत गंभीर विषय है। मेरे द्वारा सभी सीएमओ को पत्र लिखकर निर्देश दिए जाएंगे कि यदि कहीं भी इस प्रकार की स्थिति है तो उसमें तत्काल सुधार किया जाए। आमजन को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
बता दे की शहर के हत्यारी बावड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली पाइपलाइन पूरी तरह गंदे नाले से होकर जाती है, जो आगे कशीबाई कॉलोनी स्थित पानी की टंकी तक पहुंचती है। इसी टंकी से शहर के कई वार्डों में घर-घर पानी की सप्लाई की जाती है। यही नहीं, सूत्रों के अनुसार गवली पूरा, रावणबर्डी क्षेत्र सहित शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं।
नगर के कई पार्षदों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की जानकारी नगर पालिका प्रशासन को कई बार दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पार्षदों का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। पानी की टंकियों की सफाई कब और कैसे होती है, इसकी जानकारी न जनप्रतिनिधियों को है और न ही आम जनता को। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया और पाइपलाइनों व टंकियों की समुचित जांच व सफाई नहीं की गई, तो वह दिन दूर नहीं जब आगर शहर भी इंदौर जैसी भयावह स्थिति का सामना करने को मजबूर हो जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कलेक्टर प्रीति यादव के निर्देशों के बाद नगर पालिका प्रशासन कितनी तत्परता से इस गंभीर समस्या का समाधान करता है, या फिर शहरवासियों की सेहत यूं ही खतरे में बनी रहेगी।

