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सुसनेर में सरकारी भूमि पर बना डाला ‘संस्कार वेयरहाउस’! कलेक्टर प्रीति यादव तक पहुँचा मामला… कलेक्टर ने कहा – तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के दिए जाएंगे निर्देश

आगर-मालवा- सुसनेर क्षेत्र के ग्राम आमला नानकार की सरकारी एवं चरनोई भूमि पर बनाए गए विवादित संस्कार वेयरहाउस प्रकरण का मामला अब कलेक्टर प्रीति यादव तक पहुँच चुका है। कलेक्टर ने सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच के बाद कहा है कि तहसीलदार सुसनेर को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाएंगे।

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम आमला नानकार के सर्वे नंबर 128/9 एवं खसरा नंबर 246, कुल 0.42 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर निजी संचालक द्वारा वर्षों से वेयरहाउस का संचालन किया जा रहा है। यह भूमि शासकीय एवं चरनोई उपयोग की श्रेणी में दर्ज है, जिस पर निजी व्यावसायिक गतिविधि प्रतिबंधित है।

इस प्रकरण की निगरानी अपर आयुक्त उज्जैन के न्यायालय में भूमाफिया वर्ष 2019 लगाई थी जिसके क्रमांक 007/19- 20 थे जिसके बाद 14मई 2025 को अपर आयुक्त उज्जैन के न्यायालय में निगरानी ख़ारिज करते हुए कलेक्टर आगर मालवा को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाकर उसे संरक्षित किया जाए।

पूर्व कलेक्टर संजय कुमार सिंह ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर आयुक्त उज्जैन को पत्र लिखकर सरकारी भूमि के व्यावसायिक उपयोग और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी। जिसके बाद उक्त पत्र को ध्यान में रखते हुई भू माफिया की निगरानी ख़ारिज की गई थी। जिसकी सुर्खियां मीडिया में थी जिस पर तत्कालीन कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने समयावधि बैठक में सुसनेर के अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने के निर्देश थे । लेकिन उनका स्थानांतरण अन्य जिले में होने से मामला दब गया था ।

कलेक्टर प्रीति यादव के कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों ने इस पुराने विवाद कलेक्टर को लिखित पत्र देकर अवगत कराया है जिसको कलेक्टर श्रीमती यादव ने प्राथमिकता से लिया है, यह उम्मीद जताई जा रही है कि वर्षों से लंबित यह प्रकरण अब निर्णायक मोड़ लेगा।

इस वेयरहाउस के निर्माण के लिए पंजाब नेशनल बैंक, कंठाल शाखा उज्जैन द्वारा एक करोड़ 15।लाख ऋण स्वीकृत किया गया था, जबकि भूमि विवादित और शासकीय दर्ज थी। इससे अब राजस्व विभाग व वित्तीय संस्थान की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकरण की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद से वे लगातार प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालांकि, कलेक्टर स्तर पर मामला पहुँचने के बाद अतिक्रमण हटाने और जवाबदेही तय करने की उम्मीद बढ़ गई है।

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