अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- शहर के छावनी झंडा चौक पर लंबे समय से संचालित कथित फर्जी क्लिनिक का मामला अब जिला प्रशासन से निकलकर सीधे प्रभारी मंत्री तक पहुंच गया है। झोलाछाप डॉक्टर कमल कारपेंटर द्वारा बिना किसी वैध डिग्री और पंजीयन के मरीजों का इलाज किए जाने के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर प्रीति यादव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई न होना बड़े सवाल खड़े कर रहा हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत सामने आने पर कलेक्टर प्रीति यादव ने तत्काल CMHO को निर्देश दिए थे कि एक टीम गठित कर मौके पर पहुंचे, उपचार कर रहे व्यक्ति की चिकित्सा डिग्री, रजिस्ट्रेशन सहित सभी वैध दस्तावेजों की जांच करे और दस्तावेज न मिलने की स्थिति में क्लिनिक को तत्काल सील किया जाए। यहां तक कि यह भी कहा गया था कि यदि संबंधित व्यक्ति मौके पर मौजूद न मिले, तब भी क्लिनिक सील किया जाए लेकिन कलेक्टर के इन सख्त निर्देशों के बावजूद CMHO डॉ. दिनेश दहलवार द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बाद में जब मामला दोबारा कलेक्टर के संज्ञान में आया, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर केवल औपचारिकता निभाई, जिसे लोग ‘खानापूर्ति’ करार दे रहे हैं।

अब यह पूरा प्रकरण प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान तक पहुंच चुका है। प्रभारी मंत्री ने मामले को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए कहा कि वे कलेक्टर से चर्चा कर इसकी जांच कराएंगे और दोषियों पर उचित व सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जब उनसे झोलाछाप कमल कारपेंटर को भाजपा नेताओं के कथित संरक्षण के आरोपों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. फिलहाल सवाल यह है कि जब कलेक्टर जैसे सर्वोच्च जिला अधिकारी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हों, तो आमजन की सेहत और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? अब सबकी नजरें प्रभारी मंत्री और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।











