आगर मालवा- जिला कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक ऐसी पीड़ा सामने आई, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। नलखेड़ा तहसील के ग्राम बेरछाखेड़ी निवासी 39 वर्षीय दयाराम, जो हाथ–पैर से दिव्यांग हैं और बिना सहारे कोई भी काम नहीं कर सकते, अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे।
दयाराम बचपन से ही दिव्यांग हैं। चार वर्ष की उम्र में पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी मां ने ही उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। गरीबी और संघर्ष भरी जिंदगी में मां ही उनका एकमात्र सहारा थीं। लेकिन वर्ष 2018 में मां की तबियत बिगड़ने लगी। आर्थिक तंगी के चलते उनके पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे।
मां को किसी भी कीमत पर बचाने की कोशिश में दयाराम ने अपनी पुश्तैनी 5 बीघा कृषि भूमि 5 लाख रुपये में गांव के ही एक व्यक्ति को गिरवी रख दी। इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। वर्ष 2021 में कोविड के दौरान उनकी मां ने दम तोड़ दिया।
मां के जाने के बाद से दयाराम अपनी बहन के घर सहारे का जीवन जी रहे हैं। दिव्यांग होने के कारण वे किसी तरह का काम नहीं कर पाते। ऐसे में उनका एकमात्र सहारा वही जमीन है, जिसे वे वापस पाना चाहते हैं ताकि खेती कर अपना भरण-पोषण कर सकें।
लेकिन जमीन छुड़वाने के लिए जरूरी रकम उनके पास नहीं है। इसी उम्मीद में वे पिछले चार वर्षों से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई।
जनसुनवाई में दयाराम ने प्रशासन के सामने अपनी मार्मिक गुहार रखी—
“मां के इलाज के लिए जमीन गिरवी रखी… अब उसे छुड़वाने की ताकत नहीं है। मेरी परेशानी मुख्यमंत्री तक पहुंचा दें, ताकि मुझे थोड़ी आर्थिक सहायता मिल जाए और मैं अपनी जमीन वापस लेकर खेती कर सकूं।”
हालांकि जनसुनवाई मे उन्होंने आवेदन दिया हैं और अधिकारियो ने मदद का आश्वासन दिया हैं.

