अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले में एक अनोखा प्रशासनिक फैसला शहर मे चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आगामी 20 फरवरी को संभावित भारी बारिश को देखते हुए कृषि उपज मंडी को बंद रखने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश जारी होते ही यह निर्णय शहर भर में चर्चा का विषय बन गया और लोगों के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। दरअसल, 18 फरवरी को मंडी व्यापारी एसोसिएशन द्वारा एक पत्र लिखकर 20 फरवरी को मंडी बंद रखने की मांग की गई थी। व्यापारियों का तर्क था कि 18 फरवरी को कई किसानों की उपज नहीं बिक पाई और 19 फरवरी को भी बड़ी मात्रा में उपज आने की संभावना थी। ऐसे में यदि 20 फरवरी को बारिश होती है तो किसानों की फसल खराब होने की आशंका बढ़ जाती। इसी आधार पर अवकाश की मांग की गई थी।
व्यापारी संघ के आवेदन पर मंडी सचिव ने तत्काल प्रभाव से 20 फरवरी को मंडी बंद रखने का आदेश जारी कर दिया। जैसे ही यह आदेश आम लोगों तक पहुंचा, हर तरफ इस अजीबोगरीब निर्णय की चर्चा होने लगी, क्योंकि आमतौर पर मंडियां खराब मौसम में भी संचालित रहती हैं, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
इस पूरे मामले पर जब मंडी सचिव से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें कार्यभार संभाले अभी कुछ ही दिन हुए हैं और मंडी की परिस्थितियों की पूरी जानकारी नहीं है। इसी कारण जल्दबाजी में यह निर्णय ले लिया गया। हालांकि उन्होंने व्यापारी संघ को सख्त शब्दों में चेतावनी भी दी है कि भविष्य में इस तरह के पत्रों की पुनरावृत्ति न हो। वहीं व्यापारी संघ के अध्यक्ष सतीश मित्तल ने अपने पक्ष में कहा कि उनका उद्देश्य किसानों को नुकसान से बचाना था, क्योंकि लगातार दो दिनों से उपज की आवक अधिक थी और बिक्री नहीं हो पा रही थी। ऐसे में बारिश की आशंका के बीच अवकाश की मांग करना उन्हें उचित लगा। फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए, लेकिन केवल आशंका के आधार पर मंडी बंद करने का फैसला वाकई हैरान करने वाला है।
बारिश के डर से एक दिन पहले ही लगा मंडी मे ताला! कृषि उपज मंडी बंद का अनोखा फरमान बना चर्चा का विषय

