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शहर की सड़कों पर “गन कल्चर” का तांडव! कारों से बंदूकें लहराते हुवे निकले स्कूली बच्चे, पुलिस बनी मूकदर्शक, वीडियो ने मची खलबली

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जहाँ एक ओर स्कूलों को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और संस्कारों की नींव माना जाता है, वहीं जिला मुख्यालय आगर मालवा में सामने आया एक हैरान कर देने वाला दृश्य पूरे शिक्षा तंत्र और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। शहर की सड़कों पर पढ़ाई करने की उम्र में पहुँचे स्कूली बच्चे खुलेआम बंदूकें लहराते हुए कारों के काफिले में हुड़दंग मचाते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, एक निजी स्कूल में अध्ययनरत बच्चों ने करीब 10 से 15 कारों का काफिला बनाया और शहर की मुख्य सड़कों पर निकल पड़े। इन कारों की खिड़कियों से बच्चे बाहर झुककर बंदूकें लहराते, शोर-शराबा करते और दहशत फैलाते दिखाई दिए। जब यह काफिला बड़ौद रोड चौराहे से गुजरा तो वहां मौजूद आम लोग यह नजारा देखकर स्तब्ध रह गए। लोग आपस में चर्चा करने लगे कि आखिर इन नाबालिग बच्चों को इस तरह कानून हाथ में लेने की इजाजत किसने दी।


सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की मौजूदगी में होता रहा। चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी इस हुड़दंग को देखते रहे, लेकिन किसी ने भी बच्चों को रोकने या बंदूकें लहराने से मना करने की कोशिश नहीं की। इसके बाद कारों का यह काफिला मास्टर कॉलोनी पहुंचा, जहां बच्चों ने न सिर्फ जमकर हुड़दंग मचाया बल्कि यातायात जाम की स्थिति भी पैदा कर दी, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे शहर में खलबली मच गई। लोग पुलिस की भूमिका और स्कूल प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाने लगे। इस मामले में जब सीएसपी मोतीलाल कुशवाह से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों द्वारा इस तरह बंदूकें लहराना पूरी तरह गलत और कानून के खिलाफ है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब यह सब कुछ पुलिस के सामने हुआ तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में निजी स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी उजागर हुई है। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इस तरह के कृत्य से न तो रोका और न ही कोई स्पष्ट निर्देश जारी किए। शिक्षा के मंदिर में पढ़ने वाले यदि इस प्रकार गन कल्चर और हुड़दंग को अपना रहे हैं, तो यह समाज और भविष्य दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद पुलिस, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।

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