अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था आगर मालवा जिले में अपनी साख खोती नजर आ रही है। जिले में शिकायतों के समयबद्ध और संतोषजनक निराकरण को लेकर कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा बार-बार सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। हालात यह हैं कि जिले में विभिन्न विभागों की कुल 4 हजार 746 शिकायतें अब भी लंबित पड़ी हुई हैं, जिससे आमजन में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति नगर पालिका, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की बताई जा रही है, जहां शिकायतों के निराकरण में घोर लापरवाही बरती जा रही है। नगर पालिका में दर्ज कई शिकायतों को महीनों बीत जाने के बाद भी अधिकारियों द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मौके पर कार्रवाई करने की बजाय सिर्फ पोर्टल पर जवाब दर्ज कर मामले को लंबित रखा जा रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में राजस्व विभाग की 1131 शिकायतें, स्वास्थ्य विभाग की 456, जनपद पंचायतों की 416, खाद्य विभाग की 403, महिला एवं बाल विकास विभाग की 383, ऊर्जा विभाग की 375,
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की 242 शिकायतें
अब तक निराकरण की प्रतीक्षा में हैं। इसके अलावा अन्य विभागों में भी सैकड़ों और दर्जनों शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं।
कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को प्राथमिकता से हल कर संतुष्टिपूर्वक बंद कराया जाए, लेकिन इसके बावजूद कई अधिकारी आदेशों को नजरअंदाज करते हुए शिकायतों को लंबा खींच रहे हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं और शासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। अब जिले में यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि कलेक्टर के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर आखिर कब और क्या कार्रवाई होगी? यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो सीएम हेल्पलाइन जैसी महत्वाकांक्षी योजना आम जनता के लिए राहत का माध्यम बनने की बजाय सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

