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बड़ोद रोड पर सियासी संग्राम! राहुल गांधी के विरोध में भाजपा का हल्ला बोल, कांग्रेस से आमना-सामना, वाटर कैनन चला- 15 मिनट तक चली धक्कामुक्की..

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अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले में शनिवार को बड़ोद रोड उस समय सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के विरोध में जिला कांग्रेस कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान पहले से मौजूद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से भाजपा समर्थकों की सीधी भिड़ंत हो गई और करीब 15 मिनट तक जमकर धक्का-मुक्की, नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार दिल्ली में आयोजित एआई समिट में यूथ कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश था। इसी के विरोध में भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय, युवा मोर्चा महामंत्री आयुष तिवारी और मयंक राजपूत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता बड़ोद रोड चौराहे पर एकत्रित हुए और जुलूस के रूप में कांग्रेस कार्यालय की ओर कूच किया। उधर कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता भी पहले से ही कार्यालय के बाहर जमा थे।

प्रशासन को संभावित विवाद की आशंका थी, इसलिए CSP मोतीलाल कुशवाह, SDM मिलिंद ढोके सहित भारी पुलिस बल पहले से तैनात था। नगर पालिका की दमकल गाड़ी खड़ी कर रास्ता अवरुद्ध किया गया था, लेकिन जैसे ही भाजपा कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, वे बैरिकेडिंग को धक्का देते हुए कांग्रेस कार्यालय तक जा पहुंचे।

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इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और जोरदार नारेबाजी के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच झूमाझपटी चलती रही। पुलिस ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन कर दिया, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए वाटर कैनन से पानी की तेज बौछारें छोड़ीं, जिसके बाद भीड़ तितर-बितर होने लगी। लगभग आधे घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज सियासी ड्रामे के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए अलग-अलग दिशाओं में लौट गए। घटना के दौरान पूरे बड़ोद रोड क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस ने मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रित कर ली और किसी बड़े हादसे को टाल दिया। यह घटनाक्रम एक बार फिर दर्शाता है कि राजनीतिक विरोध किस तरह पलभर में उग्र टकराव में बदल सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है।

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