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नाम नहीं लिया, लेकिन निशाना साफ! भाजपा नेता के बयान से सुसनेर की राजनीति गरमाई.. भाजपा मे दो फाड़…

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- सुसनेर जिला पंचायत वार्ड क्रमांक-1 के उपचुनाव के बीच सियासी माहौल उस समय और अधिक गरमा गया, जब प्रचार सभाओं के दौरान भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह के बयान के बाद पहले से गर्म माहौल में शनिवार को भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मोहन सिंह के तीखे इशारों ने चुनावी सरगर्मी को और तेज कर दिया।
चुनाव प्रचार सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंडल अध्यक्ष मोहन सिंह ने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले कांग्रेस में आपसी खुटपट और संगठन को कमजोर करने की कोशिशें की गईं, अब वही प्रवृत्ति भाजपा में भी दिखाई देने लगी है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर संगठन के भीतर सक्रिय कुछ चेहरों की ओर इशारा माना जा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जहां भी जाते हैं, वहां गुटबाजी पैदा कर संगठन को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने नगर परिषद चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति पहले कांग्रेस में रहा, बाद में भाजपा में शामिल हुआ और उसे अध्यक्ष पद सौंपा गया, लेकिन कुछ समय बाद वही व्यक्ति पुनः कांग्रेस में चला गया। इस घटनाक्रम को उन्होंने संगठन के साथ विश्वासघात और अवसरवादी राजनीति का स्पष्ट उदाहरण बताया।
हालांकि पूरे भाषण के दौरान उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को राजनीतिक गलियारों में गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके बयान से यह संदेश गया कि उपचुनाव के बीच भाजपा के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सभा के दौरान संगठन में अनुशासनहीनता, अंदरूनी गुटबाजी और चुनावी रणनीति को कमजोर करने जैसे मुद्दों की भी चर्चा हुई।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि समाचार पत्र द्वारा इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, फिर भी इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यकर्ताओं के बीच भी बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिला पंचायत उपचुनाव जैसे सीमित क्षेत्र के चुनाव में इस तरह की बयानबाजी का सीधा असर मतदाताओं पर पड़ सकता है। फिलहाल इस मामले में किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रचार के शुरुआती दौर में उभरी यह सियासी तल्खी आने वाले दिनों में चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक और तनावपूर्ण बना सकती है।

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