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MOS नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर खड़ा किया रामकृष्ण हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, अब लटकी कार्रवाई की तलवार, CMO बोले– गड़बड़ी मिली तो होंगी कड़ी कार्रवाई, लाइसेंस भी हो सकता है निरस्त..

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- शहर में लंबे समय से विवादों में घिरा रामकृष्ण हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला सीधे मरीजों की सुरक्षा और भवन निर्माण नियमों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि हॉस्पिटल की इमारत का निर्माण पूरी तरह अवैध तरीके से किया गया है और इसमें MOS (Minimum Open Space / Margin of Safety) जैसे अनिवार्य नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
सूत्रों के अनुसार, किसी भी हॉस्पिटल भवन के चारों ओर कम से कम 3 मीटर खुली जगह (MOS) छोड़ी जाना अनिवार्य होती है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की आवाजाही संभव हो तथा हवा-रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था बनी रहे। लेकिन आरोप है कि रामकृष्ण हॉस्पिटल संचालक ने इन नियमों को दरकिनार करते हुवे निर्माण कर दिया, जिससे न केवल नियमों की अवहेलना हुई बल्कि मरीजों की जान को भी जोखिम में डाला गया। बताया जा रहा है कि इस गंभीर अनियमितता को लेकर काफी समय पहले नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और हॉस्पिटल बेखौफ तरीके से संचालित होता रहा। अब जब मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुँचा, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया है। इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) कुशल सिंह डोडवे ने कहा कि आज ही इस प्रकरण में एक जाँच दल गठित किया जाएगा। यदि मौके पर जाँच में यह पाया गया कि हॉस्पिटल भवन का निर्माण MOS नियमों के अनुसार नहीं है, तो भवन को लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि यदि जाँच में MOS नियमों की अनदेखी प्रमाणित होती है, तो यह मामला केवल नगर पालिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
गौरतलब है कि रामकृष्ण हॉस्पिटल और इसके डॉक्टर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. संजय जामलिया पर पूर्व में गलत ऑपरेशन के गंभीर आरोप लग चुके हैं। दामदम निवासी प्रकाश कुम्भकार ने आरोप लगाया था कि उनके 8 वर्षीय पुत्र का गलत ऑपरेशन कर दिया गया, जिसके कारण उसका जीवन हमेशा के लिए प्रभावित हो गया और वह भविष्य में पिता नहीं बन सकेगा। यह मामला अब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक पहुँच चुका है, जहाँ पीड़ित को न्याय और संबंधित डॉक्टर पर कार्रवाई का आश्वासन मिला है। अब देखना यह होगा कि MOS नियमों के उल्लंघन को लेकर शुरू होने वाली जाँच में क्या सच सामने आता है और क्या प्रशासन वास्तव में मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कड़ी कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह

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