रामकृष्ण हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर संकट के बादल! 7 दिवस में दस्तावेज पेश नहीं किए तो अवैध निर्माण पर चल सकता है बुलडोजर, CMO का आखिरी अल्टीमेटम

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा। शहर के विवादित रामकृष्ण हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर अब नगर पालिका प्रशासन का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। बार-बार जारी किए गए सूचना पत्रों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा भवन निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) कुशल सिंह डोडवे ने कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रबंधन को 7 दिवस का अंतिम अल्टीमेटम दिया है. स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में भवन निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज, स्वीकृत नक्शा एवं अन्य आवश्यक अनुमतियां प्रस्तुत नहीं की गईं तो अवैध निर्माण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा अस्पताल प्रबंधन को कई बार सूचना पत्र जारी कर भवन निर्माण से संबंधित सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज दिनांक तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई जवाब या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। लगातार अनदेखी के बाद अब नगर पालिका ने इसे अंतिम अवसर मानते हुए सात दिवस की मोहलत दी है। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा नगर पालिका को प्रमाणित दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें अस्पताल निर्माण के दौरान MOS (मार्जिन ओपन स्पेस) नियमों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. बताया जा रहा है कि अस्पताल की इमारत तीन अलग-अलग भूखंडों को मिलाकर बनाई गई है। नियमानुसार प्रत्येक भूखंड में सामने 3 मीटर, पीछे 1.5 मीटर तथा एक ओर 1.5 मीटर खुला स्थान छोड़ना अनिवार्य होता है, लेकिन आरोप है कि इन सभी नियमों की अनदेखी करते हुए बिना आवश्यक खुली जगह छोड़े एक संयुक्त भवन का निर्माण कर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार MOS नियम केवल भवन निर्माण की औपचारिकता नहीं बल्कि मरीजों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। आगजनी, भूकंप या अन्य आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए भवन के चारों ओर पर्याप्त खुला स्थान होना आवश्यक होता है। ऐसे में यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा। नगर पालिका प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों की जांच में यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो अस्पताल पर जुर्माना, सीलिंग अथवा अवैध हिस्से के ध्वस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरे शहर की नजर नगर पालिका की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। अब यह देखना होगा कि सात दिवस के भीतर अस्पताल प्रबंधन दस्तावेज प्रस्तुत करता है या फिर प्रशासन अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर एक मिसाल पेश करता है।

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