आगर-मालवा- प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन आगर नगर में इस योजना के लाभ को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने योजना की पात्रता और दस्तावेजों के सत्यापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिकायतकर्ता ने शासकीय कर्मचारी राहुल भटनागर पर कथित रूप से गलत जानकारी, शपथ-पत्र और दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा मामले की शिकायत आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सहित संबंधित अधिकारियों से करते हुए दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। शिकायत के अनुसार, राहुल भटनागर द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन में स्वयं को दैनिक वेतनभोगी बताते हुए वार्षिक आय 1 लाख 20 हजार रुपये दर्शाई गई, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि भटनागर उस समय स्थाई शासकीय कर्मचारी था और उसे प्रतिमाह 15 हजार रुपये से अधिक वेतन प्राप्त हो रहा था। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2020 में जारी आय प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया गया। मामले में लगाए गए आरोपों के अनुसार, योजना के लिए प्रस्तुत शपथ-पत्र में भटनागर ने नगर सीमा क्षेत्र में अपने नाम पर कोई पक्का मकान नहीं होने की घोषणा की, जबकि वार्ड क्रमांक 17 स्थित तिरूपति विहार कॉलोनी में भवन क्रमांक 84 पहले से निर्मित होने का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भवन बहुमंजिला पक्का मकान है और उसका निर्माण कई वर्ष पूर्व किया जा चुका है। साथ ही इस मकान का नगर पालिका में नियमित रूप से संपत्ति कर जमा किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि शपथ-पत्र में परिवार के किसी सदस्य के नाम पर पक्का आवास नहीं होने की घोषणा की गई, जबकि भटनागर मूल रूप से वार्ड क्रमांक 11 जमीदारपुरा रोड क्षेत्र का निवासी है और वहां उसके पिता सहित परिवार के सदस्यों के नाम पर पक्के मकान पहले से मौजूद हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन तथ्यों के बावजूद योजना का लाभ प्राप्त किया गया और जुलाई माह में भटनागर के बैंक खाते में पहली किश्त के रूप में 1 लाख रुपये की राशि भी पहुंची। आरोपों में यह भी कहा गया है कि भटनागर ने वर्ष 2019 में वार्ड क्रमांक 17 स्थित तिरूपति विहार कॉलोनी में प्लॉट क्रमांक 84 खरीदा था और बाद में इसी प्लॉट पर बहुमंजिला पक्का मकान बना लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए वास्तविक मकान की जगह उसके पास स्थित खाली प्लॉट का फोटो खींचकर उसे अपना प्लॉट बताते हुए नगर पालिका में प्रस्तुत किया गया शिकायतकर्ता ने इस संबंध में मकान और संपत्ति कर से जुड़े दस्तावेज भी जांच के लिए प्रस्तुत किए हैं।
शिकायत में राहुल भटनागर के शासकीय कर्मचारी होने का उल्लेख करते हुए उसके पूर्व पदस्थापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार भटनागर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय नेहरू महाविद्यालय, आगर से जुड़ा रहा है। पूर्व में महाविद्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में किए गए कथित दस्तावेजी कार्यों को लेकर मामला सामने आने के बाद उसे शासकीय महाविद्यालय बड़ोद में चौकीदार के रूप में अटैच किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार पूर्व में उसे उच्च कुशल श्रमिक का वेतन मिलता रहा, जबकि बाद में जांच के उपरांत चौकीदार का वेतन दिए जाने और अधिक भुगतान की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई। वर्तमान में भी चौकीदार का बेसिक वेतन 16 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक होने का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कोई अपात्र व्यक्ति गलत जानकारी अथवा दस्तावेजों के आधार पर योजना का लाभ प्राप्त करता है तो इससे सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठने के साथ-साथ किसी पात्र गरीब परिवार का हक भी प्रभावित हो सकता है। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को शिकायत कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है। साथ ही जिले के जनप्रतिनिधियों से भी कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना यह है कि नगर पालिका द्वारा शिकायत में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दस्तावेजों की किस स्तर पर जांच की जाती है तथा जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।
हालांकि, राहुल भटनागर पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो योजना के तहत प्राप्त राशि की वसूली के साथ गलत जानकारी अथवा दस्तावेज प्रस्तुत करने के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खुद का पक्का मकान, फिर भी गरीब बनकर लिया PM आवास! शासकीय कर्मचारी पर फर्जी दस्तावेज से लाभ लेने के आरोप











