कलश लेने की होड़ में मची भगदड़, विधायक मधु गेहलोत की कलश यात्रा में ध्वस्त हुई व्यवस्था: महिलाओं के दबने से मचा हड़कंप..

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- विधायक मधु गेहलोत द्वारा गुरुवार को कृषि उपज मंडी परिसर में निकाली जा रही कलश यात्रा के दौरान उस समय अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई, जब कलश लेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं एक साथ आगे बढ़ गईं। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कई महिलाएं भीड़ के बीच दब गईं, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई।
गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने के बाद कलश वितरण शुरू हुआ। कलश लेने के लिए महिलाओं की भीड़ अचानक आगे बढ़ी और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ महिलाएं भीड़ के दबाव में फंस गईं और उन्हें बाहर निकालने के लिए आसपास मौजूद लोगों को मशक्कत करनी पड़ी। घटना ने विधायक के आयोजन में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों महिलाओं की मौजूदगी वाले धार्मिक आयोजन में यदि कलश वितरण के दौरान ही भीड़ इस तरह बेकाबू हो जाए तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। गनीमत रही कि मौके पर स्थिति और ज्यादा गंभीर होने से पहले लोगों ने हस्तक्षेप कर भीड़ में फंसी महिलाओं को बाहर निकाल लिया।
इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के जुटने की संभावना पहले से थी, इसके बावजूद कलश वितरण के लिए भीड़ को अलग-अलग समूहों में नियंत्रित करने, प्रवेश और निकासी के अलग रास्ते बनाने तथा महिलाओं को व्यवस्थित तरीके से कलश उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। यदि समय रहते भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता तो भगदड़ गंभीर हादसे में बदल सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कलश लेने के लिए जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, पीछे से भी बड़ी संख्या में महिलाएं आगे आने लगीं। इससे कुछ देर के लिए मौके पर धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भीड़ में फंसी महिलाओं को देखकर आसपास मौजूद लोगों में भी हड़कंप मच गया।
बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण होता है। विशेषकर तब, जब एक साथ हजारों महिलाएं किसी एक स्थान से सामग्री लेने के लिए पहुंच रही हों। ऐसे में पुलिस, प्रशासनिक अमले और आयोजन समिति द्वारा पर्याप्त बैरिकेडिंग, कतार व्यवस्था, स्वयंसेवकों की तैनाती और अलग-अलग चरणों में वितरण की व्यवस्था की जरूरत होती है। लेकिन विधायक मधु गेहलोत की कलश यात्रा में कलश वितरण के दौरान बने हालात ने आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि इतनी बड़ी भीड़ जुटने की जानकारी होने के बावजूद क्या आयोजकों ने संभावित भगदड़ जैसे हालात से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की थी? कलश लेने की होड़ में महिलाओं के दबने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी रही। हालांकि तत्काल किसी बड़े हादसे की सूचना सामने नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए बने हालात ने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
अब सवाल उठ रहा है कि यदि भीड़ में किसी महिला के गिरने के बाद उसके ऊपर दर्जनों लोग गिर जाते या भगदड़ कुछ और बढ़ जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती? धार्मिक आस्था से जुड़े इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा को प्राथमिकता देना आयोजकों की जिम्मेदारी थी। घटना के बाद आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

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