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कॉलेज नहीं, लूट का अड्डा बना नेहरू महाविद्यालय! चौकीदार, कंप्यूटर, बस और पुताई- हर जगह घोटाला, EOW के पास पंहुचा मामला…

अरविंद दुगारिया, आगर-मालवा- शासकीय नेहरू महाविद्यालय एक बार फिर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। चौकीदार की नियुक्ति से लेकर लाखों रुपये की खरीदी, बस अनुबंध और रंगाई-पुताई तक, कॉलेज में हर स्तर पर नियमों की अनदेखी और सरकारी धन की खुलेआम बंदरबाट सामने आई है। लंबे समय तक कार्रवाई न होने से नाराज़ शिकायतकर्ता ने दोबारा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) का दरवाज़ा खटखटाया, जिसके बाद सहायक महानिरीक्षक (अपराध), EOW भोपाल द्वारा अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को पत्र जारी किया गया है। इससे घोटाले का मामला फिर गरमा गया है।
जिला मुख्यालय स्थित शासकीय नेहरू महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। शिकायत मिलने पर तत्कालीन कलेक्टर आगर ने संयुक्त कलेक्टर मिलिंद ढोके की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। समिति ने करीब ढाई माह तक विस्तृत जांच कर गंभीर अनियमितताओं को उजागर करते हुए प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने उच्च शिक्षा आयुक्त को कार्रवाई हेतु पत्र लिखा, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

चौकीदार से चला सिस्टम
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चौकीदार द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य किया गया। इससे टेंडर प्रक्रिया से लेकर देयकों के भुगतान तक उसकी भूमिका अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, चौकीदार के जिला कोषालय के कुछ जिम्मेदारों से करीबी संबंध भी बताए जाते हैं, जिससे भुगतान में आपत्ति न आने के सवाल खड़े हो रहे हैं।

खरीदी में भारी गड़बड़ी
भंडार क्रय नियमों को ताक पर रखकर गुपचुप बीड बुलाते हुए 18 कंप्यूटर 83,295 रुपये प्रति नग के हिसाब से करीब 15 लाख रुपये में खरीदे गए, जबकि अन्य दस्तावेजों में जीएसटी सहित 59,740 रुपये प्रति नग की दर सामने आई। इसी तरह एक ही फर्म से 564 पर्दे 315 रुपये प्रति नग खरीदे गए, जबकि जानकारों का कहना है कि कॉलेज में इतनी खिड़कियां-दरवाजे ही नहीं हैं। रंगाई-पुताई का काम, जो सामान्यतः 1-2 लाख रुपये में हो सकता था, उसे बढ़ाकर करीब 10 लाख रुपये तक दिखाया गया।

बस अनुबंध में भी खेल
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए बस सेवा के नाम पर जेम पोर्टल से 13.99 लाख रुपये वार्षिक का अनुबंध किया गया। शर्तों में 52 से अधिक सीट क्षमता और 2019 मॉडल तय था, लेकिन प्रस्तुत दस्तावेजों में 9+1 सीटिंग क्षमता और 2017 मॉडल का रजिस्ट्रेशन मिला। भौतिक निरीक्षण में बस का रजिस्ट्रेशन नंबर और सीट क्षमता भी अलग पाई गई, इसके बावजूद बीड को तकनीकी रूप से अमान्य नहीं किया गया।

पौधारोपण में भी अनियमितता
कॉलेज परिसर में पौधारोपण के लिए 80 गड्ढों की खुदाई 215 रुपये प्रति गड्ढा बताकर 17,200 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि नगर पालिका से प्राप्त अभिमत में प्रति गड्ढा संभावित दर 100 रुपये बताई गई थी।

  करीब 19 बिंदुओं पर हुई जांच में सीधे-सीधे आर्थिक अनियमितताएं सामने आने के बाद भी कार्रवाई का अभाव सवालों के घेरे में है। अब EOW के पत्र के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि शिक्षा के मंदिर में हुई इस महालूट के जिम्मेदारों पर आखिरकार कानूनी शिकंजा कसेगा।
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