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SIR मैपिंग की गड़बड़ी ने खोली चुनावी मशीनरी की पोल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी का वोट इंदौर मे, जिलाध्यक्ष ने कहा- यह चुनावी खेल है, आयोग बना सत्ता का एजेंट…

आगर मालवा- जिले में जारी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया हर दिन नए खुलासे कर रही है। अब मामला सिर्फ आम मतदाताओं की विसंगतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनप्रतिनिधियों के नाम और पते भी गलत विधानसभा क्षेत्रों में मैप किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर(गर्ग) का नाम भी विवादों में आ गया है।
विजयलक्ष्मी तंवर, जो कि बड़ोद तहसील के ग्राम जयसिंहपुरा की निवासी हैं. इन्होने SIR प्रक्रिया के तहत अपना फार्म भरकर संबंधित BLO को सौंपा था। लेकिन मैपिंग के दौरान जो तथ्य सामने आया, उसने सबको चौंका दिया उनकी वोट इंदौर की विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 5, पार्ट-199, नवरतनबाग में दर्ज दिखाई गई. BLO मंगला वर्मा (208-इंदौर-5) के मोबाइल से यह मैपिंग हो चुकी हैं, जिसमें EPIC नंबर WMZ4770509 भी अंकित था। यह जानकारी सामने आते ही विजयलक्ष्मी तंवर हैरान और स्तब्ध रह गईं।
प्रेसवार्ता में उन्होंने खुलकर कहा की यह साधारण भूल नहीं, एक बहुत बड़ी गड़बड़ी है। मैं कभी उस विधानसभा में गई तक नहीं, फिर बिना मेरे हस्ताक्षर मेरे नाम की मैपिंग इंदौर में कैसे हो गई यह समझ से परे हैं. मै 2009 मे आगर के वार्ड क्रमांक 6 से पार्षद बनी और वर्ष 2014 मे कांग्रेस पार्टी के मेंडेट से नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग पूरी तरह लापरवाह है और भाजपा का दलाल बनकर काम कर रहा है। इस तरह की गड़बड़ियाँ लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि अगर एक जिलाध्यक्ष की वोट गलत विधानसभा में जा सकती है, तो आम मतदाताओं के नाम और पतों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिलेभर में मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियाँ, गलत पते, गलत मैपिंग, और बिना दस्तावेजों के बदलाव जैसे मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। प्रेसवार्ता में मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया सिस्टमेटिक गड़बड़ी का संकेत देती है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की संभावनाएँ नज़र आती हैं। जिलाध्यक्ष के इस आरोप के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या निर्वाचन आयोग इस गंभीर मामले की जांच करेगा या फिर इसे भी सामान्य त्रुटि बताकर टाल दिया जाएगा।

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