अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- मां बगलामुखी के दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए शनिवार का दिन काल बनकर आया। मंदिर के समीप उफनते बरसाती नाले को पार करने के दौरान श्रद्धालुओं से भरी कार तेज बहाव की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पानी के साथ बह गई। दर्दनाक हादसे में कार सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 3 मासूम बच्चे, 2 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। हादसे के बाद पूरे नलखेड़ा में शोक के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोश का माहौल दिखाई दिया। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल नाले के पास सुरक्षा के लिए की गई बैरिकेडिंग को लेकर खड़ा हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीणा ने मंदिर प्रशासन को लोक निर्माण विभाग द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स वापस करने तथा अपने स्वयं के बैरिकेड्स लगाने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि इसके बाद मौके से पीडब्ल्यूडी के बैरिकेड्स हटा लिए गए। अब हादसे के बाद यही निर्णय सवालों के घेरे में है कि जब बरसात के दौरान नाला उफान पर आता है तो वहां वाहनों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक बैरिकेडिंग और प्रभावी रोकथाम की व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उस स्थान पर मजबूत बैरिकेड्स मौजूद होते और पानी का बहाव बढ़ने पर वाहनों को आगे जाने से रोका जाता तो संभव है कि कार नाले की ओर नहीं जाती और हादसा टल सकता था। हालांकि हादसा वास्तव में सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण हुआ या अन्य परिस्थितियां जिम्मेदार थीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
बताया जा रहा है कि श्रद्धालु ओडिशा से मां बगलामुखी के दर्शन के लिए आए थे और उज्जैन से किराए की कार लेकर नलखेड़ा पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर के समीप बरसाती नाला तेज बहाव में था। कार नाला पार करने के दौरान अचानक पानी की तेज धार की चपेट में आ गई। बहाव इतना तेज था कि कार पुलिया से करीब 100 मीटर तक पानी के साथ बहती चली गई। कुछ ही पलों में कार पानी में समा गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का अवसर नहीं मिल सका।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन का अमला मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीणा और एसपी दिलीप कुमार सोनी भी घटनास्थल पर पहुंचे तथा रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की। काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया। कार में सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए। घटना की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी के बीच मातम का माहौल बन गया। मृतकों में कार चालक अरुण गोयल निवासी सुदवास, बड़ौद, जिला आगर-मालवा की पहचान हुई है। वहीं ओडिशा से आए श्रद्धालुओं में राधा रानी बहेरा, ज्ञानेंद्र कुमार बहेरा, रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बहेरा, कृष्णा राजवीर पुत्र शिवप्रसाद बहेरा और शिवप्रसाद बहेरा की पहचान सामने आई है। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश भी सामने आया। लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में नाले और पुलिया जैसे संवेदनशील स्थानों पर सिर्फ सामान्य व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। पानी का बहाव बढ़ते ही वाहनों को रोकने, मजबूत बैरिकेडिंग लगाने और स्पष्ट चेतावनी संकेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था जरूरी है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब मां बगलामुखी मंदिर में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो बरसात के दौरान संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? यदि पहले से लगे बैरिकेड्स हटाए गए थे तो उनके स्थान पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या नाले में पानी का बहाव खतरनाक होने के बाद वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था थी? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। हादसे के बाद नलखेड़ा में गहरा शोक दिखाई दिया। कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय महिलाओं ने रेस्क्यू के बाद की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शवों को ढंकने के लिए पर्याप्त कपड़े तक तत्काल उपलब्ध नहीं थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी दुकानों से चुनरी और अन्य सामग्री उपलब्ध कराकर शवों को ढंकने की व्यवस्था की।
तीन मासूम बच्चों के शव देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हादसे की भयावहता ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। स्थानीय लोगों ने शवों को ले जाने के लिए पर्याप्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने का आरोप भी लगाया और नगर परिषद के वाहन के इस्तेमाल की बात कही, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। अब आठ जिंदगियां खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी तय होगी। क्या उफनते नाले के पास श्रद्धालुओं और वाहनों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या बैरिकेडिंग प्रभावी रूप से मौजूद थी? क्या चेतावनी संकेत लगाए गए थे? क्या पानी का बहाव बढ़ने के बाद वाहनों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए गए थे? और यदि बैरिकेड्स हटाए गए थे, तो उनके स्थान पर वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई? हादसे के बाद अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर है। यदि जांच में सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है। फिलहाल नलखेड़ा का यह दर्दनाक हादसा आठ परिवारों को गहरा दुख देकर गया है और मां बगलामुखी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा बरसात के दौरान प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल छोड़ गया है।
कलेक्टर के निर्देश, हटे बैरिकेड्स और फिर बह गईं 8 जिंदगियां! नलखेड़ा में उफनते नाले में बही कार, 8 की मौत, हादसे के बाद प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल











