VIP आए तो नलखेड़ा पुलिस मुस्तैद, 8 जिंदगियां बहीं तो नलखेड़ा पुलिस नींद मे? हादसे ने खड़े किए थाना प्रभारी शशि उपाध्याय की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल..

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पास 19 सितंबर की रात उफनते बरसाती नाले में कार बहने से 8 लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेज बहाव के बीच कार नाला पार करने के दौरान बह गई। स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नलखेड़ा क्षेत्र में बारिश के दौरान पुलिया और नाले पर पानी का तेज बहाव था, तब वहां यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की सक्रियता कितनी थी? क्या थाना स्तर पर ऐसे संवेदनशील स्थानों की निगरानी और लोगों को रोकने की कोई व्यवस्था थी? यदि थी, तो वह मौके पर क्यों नजर नहीं आई और यदि नहीं थी, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? VIP और महत्वपूर्ण लोगों के नलखेड़ा आगमन पर पुलिस बल की व्यापक तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है। ऐसे में आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भी उसी स्तर की सतर्कता क्यों नहीं दिखाई गई, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है। खासकर नलखेड़ा थाना प्रभारी शशि उपाध्याय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि बारिश और उफान की स्थिति में संवेदनशील मार्गों की सुरक्षा को लेकर थाना स्तर से क्या कदम उठाए गए थे।
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया और वाहन व शवों को बाहर निकाला। लेकिन अब सवाल केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं हैं। हादसे से पहले संभावित खतरे को रोकने के लिए क्या पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाई थी, इसकी भी जांच जरूरी है।
आठ लोगों की मौत के बाद अब यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उस रात पुलिस की ड्यूटी कहां-कहां लगाई गई थी, मंदिर क्षेत्र और पुलिया की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी, पानी बढ़ने की सूचना पुलिस को थी या नहीं और यदि थी तो श्रद्धालुओं एवं वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई। इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे में केवल चालक की भूमिका थी या व्यवस्था की चूक ने भी खतरा बढ़ाया।

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