अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- देश में ईंधन की बचत और सरकारी खर्चों में कमी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपील करते रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी वीआईपी संस्कृति को कम करने की दिशा में अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या घटाई है। लेकिन आगर मालवा में शुक्रवार को ग्राम पंचायत भ्याना में आयोजित जन विश्वास शिविर में इन संदेशों की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। शिविर में आगर कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीणा बस से पहुंचे, लेकिन उनके पीछे प्रशासनिक अधिकारियों की करीब 25 लग्जरी गाड़ियों का काफिला भी शिविर स्थल तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, कलेक्टर स्वयं वापसी में अपनी सरकारी गाड़ी से लौटे, जबकि जिस बस से वे शिविर में पहुंचे थे, वह वापस खाली लौट गई। मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिविर स्थल पर अधिकारियों के वाहनों की संख्या देखकर सवाल उठने लगे कि जब अधिकारियों के पास आने-जाने के लिए अलग-अलग सरकारी वाहन मौजूद थे, तो फिर कलेक्टर को बस से ले जाने और बाद में उनके लिए अलग से वाहन बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? यदि उद्देश्य वास्तव में ईंधन की बचत और सरकारी खर्च में कटौती था, तो इस व्यवस्था से बचत हुई या वाहनों के दोहरे इस्तेमाल से खर्च और बढ़ गया—यह सवाल अब चर्चा में है। कलेक्टर के बस से पहुंचने को ईंधन बचत और सादगी से जोड़कर देखा गया, लेकिन पीछे-पीछे पहुंचे करीब 25 वाहनों और वापसी में खाली गई बस ने पूरे इंतजाम पर ही सवाल खड़े कर दिए। तस्वीर कुछ ऐसी बनी कि ‘सफर बस से, इंतजाम लग्जरी गाड़ियों का और वापसी कार से’। अब सवाल यह है कि सरकारी आयोजनों में ईंधन बचाने और वीआईपी संस्कृति कम करने के संदेश सिर्फ दिखावे तक सीमित हैं या वास्तव में सरकारी खर्च कम करने की कोई ठोस व्यवस्था भी जमीन पर लागू होगी? भ्याना के जन विश्वास शिविर की यह तस्वीर निश्चित तौर पर प्रशासन के दावों और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर पर सवाल खड़े करती है।
यह कैसा ‘जन विश्वास’ है कलेक्टर साहब? जाते बस मे हो और आते अपनी लग्जरी कार से.. ऐसे-कैसे पूरा होगा PM का ईंधन बचाने का संकल्प..











