गणेश जी का विसर्जन था या विवाद का प्रदर्शन? गणेश प्रतिमा को ही ले आए कोतवाली थाने… भगवान के नाम पर ऐसी राजनीति और हुड़दंग शर्मनाक! देर रात पुलिस की निगरानी में हुआ विसर्जन

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धा और आस्था के साथ विसर्जन के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन जुलूस में झांकी को आगे-पीछे करने और डीजे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। हालात ऐसे बिगड़े कि गणेश प्रतिमा को विसर्जन स्थल ले जाने के बजाय कोतवाली थाने के सामने लाकर खड़ा कर दिया गया। देर रात पुलिस अधिकारियों की निगरानी और समझाइश के बाद प्रतिमा को विसर्जन के लिए रवाना किया गया। सवाल यह है कि जिस भगवान की आराधना में लोग दस दिनों तक उत्सव मनाते हैं, क्या उनके विसर्जन के समय भी आपसी विवाद और शक्ति प्रदर्शन जरूरी है? मामला आगर-मालवा जिला मुख्यालय पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के समीप मुख्य मार्ग का है। बताया जा रहा है कि गणेश विसर्जन के लिए अलग-अलग ग्रुप जुलूस के रूप में आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान झांकियों को आगे-पीछे करने और डीजे को लेकर दो पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और मारपीट की स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ लोगों को मामूली चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है। विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बड़ी संख्या में लोग कोतवाली थाने पहुंच गए। बताया जा रहा है कि एक पक्ष गणेश प्रतिमा को लेकर ही थाने पहुंच गया। यानी जिस प्रतिमा को भक्तिभाव के साथ तालाब तक पहुंचाकर भगवान को विदा करना था, वही प्रतिमा विवाद के बीच थाने के सामने खड़ी नजर आई। इसी दौरान पुलिस द्वारा दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति को थाने लाए जाने के बाद माहौल फिर गरमा गया और थाना परिसर में ही हाथापाई की स्थिति बन गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रित किया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों को समझाइश दी और मामला शांत कराया।
देर रात स्थिति सामान्य होने के बाद पुलिस की निगरानी में गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए रवाना किया गया और विसर्जन की प्रक्रिया पूरी हुई। पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है।
पूरे घटनाक्रम ने श्रद्धा, आस्था और धार्मिक आयोजनों की मर्यादा को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने खड़े होकर अगर भक्त ही आपस में भिड़ जाएं, जुलूस विवाद का अखाड़ा बन जाए और प्रतिमा को विसर्जन स्थल के बजाय थाने तक ले जाने की नौबत आ जाए, तो फिर यह सोचने की जरूरत है कि हम भगवान की भक्ति कर रहे हैं या अपने अहंकार का प्रदर्शन? गणेश उत्सव का संदेश आपसी भाईचारे और सद्भाव का है, न कि झांकी, डीजे या जुलूस में आगे रहने को लेकर विवाद और शक्ति प्रदर्शन का। भगवान को राजनीति और विवाद से दूर रखना ही सच्ची श्रद्धा है।

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