कोतवाली थाना प्रभारी सहित करीब 100 लोगों पर FIR के आदेश, राजस्थान की चौमहला कोर्ट का बड़ा फैसला, एमपी पुलिस की चर्चित NDPS कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- इसी साल जनवरी में राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में की गई आगर कोतवाली पुलिस की चर्चित NDPS कार्रवाई अब कानूनी विवादों में घिर गई है। चौमहला न्यायालय ने मामले की जांच रिपोर्ट और परिवादी पक्ष के तर्कों पर सुनवाई के बाद तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित कार्रवाई में शामिल करीब 100 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश सामने आते ही मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

मामला 28 जनवरी 2026 को राजस्थान के डग थाना क्षेत्र स्थित ग्राम घाटाखेड़ी में की गई उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें आगर कोतवाली पुलिस ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ एवं ड्रग्स निर्माण सामग्री बरामद करने तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस का कहना था कि सुसनेर निवासी फैजान से मिली जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी।

हालांकि गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने शुरू से ही कार्रवाई को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए चौमहला न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश पुलिस बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए उनके घर पहुंची, तोड़फोड़ की, परिजनों को प्रताड़ित किया और बाद में उनके पुत्रों को झूठे NDPS प्रकरण में फंसा दिया।

ASP जांच में सामने आए कई विरोधाभास

न्यायालय के निर्देश पर झालावाड़ पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द्र मीणा को सौंपी थी। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए।

जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस कार्रवाई को लेकर पुलिस ने विस्तृत तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती का दावा किया था, उससे संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। पुलिस द्वारा प्रेसवार्ता में बताए गए कई सामान जब्ती दस्तावेजों में दर्ज नहीं पाए गए। वहीं कार्रवाई के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का दावा भी जांच में पुष्ट नहीं हो सका।

अदालत में अधिवक्ताओं ने रखे तकनीकी साक्ष्य

11 जून को परिवादी हमीद खान की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने न्यायालय में विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने कहा कि NDPS जैसी संवेदनशील कार्रवाई में स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना नहीं देना, स्वतंत्र गवाहों को राजस्थान के बजाय आगर से साथ ले जाना, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती की वीडियोग्राफी नहीं करना तथा प्रक्रिया संबंधी कई नियमों का पालन नहीं किया जाना कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है।

न्यायालय में प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया गया कि मध्यप्रदेश पुलिस के सभी वाहन घाटाखेड़ी में लगभग 30 मिनट ही रुके थे। इसी दौरान तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती और अन्य संपूर्ण कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है, जबकि इतने कम समय में NDPS अधिनियम के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर कार्रवाई संभव नहीं प्रतीत होती।

अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क रखा कि जब्ती का जो समय दस्तावेजों में दर्शाया गया है, उस समय पुलिस दल राजस्थान की सीमा में मौजूद ही नहीं था। साथ ही परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों को तकनीकी साक्ष्यों से भी समर्थन मिलने की बात न्यायालय के समक्ष रखी गई।

FIR दर्ज करने के आदेश

जांच रिपोर्ट और प्रस्तुत तर्कों पर विचार करने के बाद चौमहला न्यायालय ने तत्कालीन थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित इस कार्रवाई में शामिल करीब 100 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इनमें पुलिसकर्मी एवं अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस महकमे में बढ़ी हलचल

न्यायालय के आदेश के बाद मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार FIR दर्ज होने की प्रक्रिया को रोकने अथवा आदेश के विरुद्ध कानूनी राहत प्राप्त करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। हालांकि न्यायालय के आदेश के बाद यह मामला अब दोनों राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि जनवरी में हुई इस कार्रवाई को आगर पुलिस ने बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन अब न्यायालय के आदेश के बाद पूरी कार्रवाई की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

You cannot copy content of this page