कलेक्टर शेरसिंह मीना के खिलाफ पत्रकारों का हल्लाबोल! निंदा प्रस्ताव किया पारित, शासन से आगर से हटाने की मांग

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले में कलेक्टर और पत्रकारों के बीच आपसी सामंजस्य को लेकर चल रही नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीना के खिलाफ जिले के पत्रकारों ने गांधी उपवन में बैठक आयोजित कर निंदा प्रस्ताव पारित किया। पत्रकारों ने राज्य शासन से मांग की है कि कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीना को आगर मालवा से हटाकर किसी नए कलेक्टर की पदस्थापना की जाए, जो जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए आमजन की समस्याओं का निराकरण कराए और पत्रकारों के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित करे। पत्रकारों की नाराजगी उस समय और बढ़ गई, जब शासन की महत्वाकांक्षी व्यवस्था जनसुनवाई के दौरान पत्रकारों को कवरेज करने से मना किए जाने का मामला सामने आया। पत्रकारों का कहना है कि जनसुनवाई आम नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है और इसकी गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में पत्रकारों को कवरेज से रोकना गंभीर विषय है।
गांधी उपवन में आयोजित बैठक में जिले के पत्रकारों ने कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीना की कार्यप्रणाली और पत्रकारों के साथ उनके कथित व्यवहार को लेकर चर्चा की। पत्रकारों ने कहा कि प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर संवाद एवं सामंजस्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। मीडिया जहां शासन की योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों को जनता तक पहुंचाता है, वहीं आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों को भी प्रशासन के सामने रखने का काम करता है। पत्रकारों का कहना है कि जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया को कवरेज से रोकना उचित नहीं है, क्योंकि ऐसी गतिविधियों के माध्यम से जनता को यह जानकारी मिलती है कि प्रशासन आमजन की समस्याओं को किस प्रकार सुन रहा है और उनके निराकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में पत्रकारों ने कहा कि कलेक्टर और जिले के पत्रकारों के बीच जिस प्रकार का संवाद और आपसी समन्वय होना चाहिए, वह वर्तमान परिस्थितियों में दिखाई नहीं दे रहा है। इसी को लेकर पत्रकारों में लगातार नाराजगी बनी हुई थी, जो गांधी उपवन की बैठक में खुलकर सामने आई। पत्रकारों ने राज्य शासन से मांग की कि आगर मालवा जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और आमजन के हितों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर डॉ. शेरसिंह मीना को यहां से हटाकर नए कलेक्टर की पदस्थापना की जाए। पत्रकारों का कहना है कि जिले को ऐसे प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता है, जो आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुने, उनके निराकरण के लिए प्रभावी पहल करे और मीडिया के साथ सकारात्मक संवाद एवं समन्वय बनाए रखे।
पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि जिले में ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की मांग करना है, जिसमें आमजन की आवाज सुनी जाए और उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण हो। पत्रकारों के अनुसार लोकतंत्र में मीडिया जनता और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। ऐसे में प्रशासन और पत्रकारों के बीच बेहतर संबंध एवं संवाद से ही जनहित के मुद्दों को प्रभावी तरीके से सामने लाया जा सकता है। गांधी उपवन में पारित निंदा प्रस्ताव के बाद अब पत्रकारों की मांग राज्य शासन तक पहुंचाई जाएगी। कलेक्टर को हटाने की मांग के साथ पारित इस निंदा प्रस्ताव पर अब जिले के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब निगाहें राज्य शासन के रुख पर टिकी हैं कि पत्रकारों की इस मांग पर शासन क्या निर्णय लेता है।

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