अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले के बड़ौद में महिला एवं बाल विकास विभाग में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने गुरुवार को कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर नियुक्ति दिलाने के एवज में 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के दौरान 60 हजार रुपए में सौदा तय हुआ था. लोकायुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ौद निवासी बहादुर लोहार पिता नारायण सिंह लोहार ने 4 नवंबर 2026 को लोकायुक्त उज्जैन के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित को शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसकी पत्नी रामू की महिला एवं बाल विकास परियोजना में सहायिका पद पर नियुक्ति के लिए परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची द्वारा 80 हजार रुपए की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता द्वारा राशि कम करने का आग्रह करने पर परियोजना अधिकारी 60 हजार रुपए लेने के लिए सहमत हो गया। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन किया और गुरुवार को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 30 हजार रुपए दिए जाने थे। जैसे ही परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची ने रिश्वत की राशि ली, लोकायुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई से महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई लोकायुक्त संगठन के महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह एवं लोकायुक्त उज्जैन के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के मार्गदर्शन में की गई। ट्रैप टीम में डीएसपी दिनेशचंद पटेल, निरीक्षक हीना डावर, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक शिव कुमार शर्मा, संदीप राव कदम, विशाल रेशमिया, सहायक ग्रेड-3 रश्मि महेश्वरी और सुनीता चौधरी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
30 हजार की रिश्वत लेते ही लाल हुए हाथ! आंगनवाड़ी सहायिका की नौकरी का सौदा पड़ा भारी, लोकायुक्त ने अधिकारी और सुपरवाइजर को दबोचा!











