चाय वाला PM बन सकता है तो मैं क्यों नहीं? प्राचार्य KC मालवीय के चुनावी इरादों से गरमाई सियासत.. कहा- चंद्रगुप्त नहीं मिला तो खुद उतरेंगे मैदान में!

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- निलंबित चल रहे प्राचार्य KC मालवीय के एक वीडियो ने जिले के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। वीडियो में KC मालवीय न केवल चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो वे चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते? उनके इस बयान के बाद क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वीडियो में KC मालवीय खुद को इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बताते हुए कहते हैं कि वे लंबे समय तक प्राचार्य के पद पर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से हाथ उठवाकर पूछा कि क्या वे परिवर्तन चाहते हैं? उनके इस अंदाज को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वीडियो से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की जनता को एक स्थानीय उम्मीदवार का विकल्प मिल सकता है।
KC मालवीय के इस वीडियो ने इसलिए भी सियासी चर्चाओं को हवा दी है, क्योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। यदि वे चुनावी मैदान में उतरते हैं तो स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं और स्थापित राजनीतिक दलों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि, जब इस संबंध में KC मालवीय से सीधे बात की गई तो उन्होंने फिलहाल चुनाव लड़ने से इनकार करते हुए अपने राजनीतिक इरादों को दिलचस्प अंदाज में जाहिर किया। उन्होंने कहा कि वे अभी चाणक्य की भूमिका में हैं और चुनाव लड़ने के लिए चंद्रगुप्त की तलाश कर रहे हैं। यदि उन्हें चंद्रगुप्त नहीं मिलता है तो वे खुद ही चंद्रगुप्त बनकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि KC मालवीय ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यदि वे चुनाव लड़ते हैं तो किस राजनीतिक पार्टी का दामन थामेंगे या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे। फिलहाल उनका चाणक्य बनकर चंद्रगुप्त की तलाश करने वाला बयान और चाय वाले प्रधानमंत्री का उदाहरण जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना दिलचस्प होगा कि KC मालवीय पर्दे के पीछे रहकर किसी नए चेहरे को चुनाव लड़वाते हैं या फिर खुद चंद्रगुप्त बनकर सियासी रण में उतरते हैं।

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