पत्रकारिता के एक युग का अंत… नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार बसंत गुप्ता, 75 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिले की पत्रकारिता के एक सशक्त स्तंभ और वरिष्ठ पत्रकार बसंत गुप्ता का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही जिले के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक अपनी लेखनी के माध्यम से आमजन की आवाज उठाने वाले गुप्ता के निधन को पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बसंत गुप्ता पिछले करीब 50 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत से ही जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया और आम लोगों की परेशानियों को अपनी लेखनी के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासन तक पहुंचाने का काम किया। उनकी पत्रकारिता में जनसरोकार हमेशा केंद्र में रहे। यही वजह रही कि उन्होंने जिले की पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
गुप्ता केवल समाचार लिखने वाले पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता को समाज के प्रति जिम्मेदारी मानकर काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार के रूप में जाने जाते थे। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर की समस्याओं तक, आमजन से जुड़े मुद्दों को उन्होंने लगातार अपनी खबरों में स्थान दिया। उनकी लेखनी में तथ्य, अनुभव और जनहित की भावना का समावेश रहा।
करीब पांच दशक के अपने पत्रकारिता सफर में उन्होंने कई दौर देखे। पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और तकनीक के दौर में भी उन्होंने अपनी सक्रियता बनाए रखी। उनके सानिध्य में जिले के कई पत्रकारों ने पत्रकारिता के गुर सीखे और समाचार लेखन से लेकर जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाने की बारीकियां समझीं। उनके निधन से न केवल एक वरिष्ठ पत्रकार बल्कि पत्रकारिता की एक अनुभवी पीढ़ी का भी अवसान हुआ है। बसंत गुप्ता के निधन की सूचना मिलते ही पत्रकारों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और उनके परिचितों का उनके निवास पर पहुंचना शुरू हो गया। हर कोई नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता नजर आया। उनके लंबे पत्रकारिता जीवन और समाज के प्रति योगदान को याद करते हुए लोगों ने कहा कि उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
बसंत गुप्ता का जाना आगर मालवा की पत्रकारिता के लिए ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। करीब पांच दशक तक अपनी कलम से जनहित की आवाज बुलंद करने वाला यह वरिष्ठ पत्रकार अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी लेखनी, उनका अनुभव और पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उनके निधन के साथ ही जिले की पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय का दुखद अंत हो गया।

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