अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में विजयदशमी उत्सव पर रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा पथ संचलन का आयोजन किया गया. पथ संचलन सरस्वती शिशु मंदिर से आरम्भ हुवा जो छावनी नाका, कसाईं मोहल्ला, विजय स्तम्भ होता हुवा पुनः सरस्वती स्कूल पंहुचा. पथ संचलन के पूर्व सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल परिसर में बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन हुवा. यहां कार्यक्रम के पूर्व शहर में संघ की दृष्टि से पांच बस्तियों के स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वयंसेवक कतारबद्ध होकर संम्पद हुए तथा शारीरिक कार्यक्रमों का प्रकट प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में योग, व्यायाम आसन आदि कार्यक्रमों का प्रदर्शन हुआ। मंच पर मुख्य वक्ता उमेश पाल मालवा प्रांत के सह व्यवस्था प्रमुख, मोहन आर्य जिला संघचालक और सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर डुलगज उपस्थित थे मुख्य वक्ता उमेश पाल ने बौद्धिक उद्बोधन में कहा की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा संघठन है जैसा संघ चाहता है उसी प्रकार समाज उसका अनुसरण करती है. उन्होंने आगे कहा की अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और असुरों पर देवत्व की विजय का पर्व विजयदशमी के रूप में मनाते हैं जिसके लिए हम नवरात्रि के 9 दिन माता की उपासना कर शक्ति का संचय करते है विजयदशमी के दिन ही 27 सितंबर 1925 में साथ छोटे-छोटे बाल स्वयंसेवकों को लेकर डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार ने शाखा आरंभ की. आज 100 वर्ष में राष्ट्रीय स्वयं संघ विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है। डॉ हेडगेवार ने गहन विचार किया कि देश स्वतंत्र हो भी जाए तो भी पूर्ण स्वाधीनता लंबे समय तक नहीं रह पाएगी क्योंकि इस देश के मूल समाज हिंदू समाज में कुछ कमजोरी को दूर किए बिना इस देश को परम वैभव के शिखर पर नहीं पहुंचाया जा सकता है. संघ के प्रारंभ के 25 वर्ष में संगठनात्मक संरचना का विकास हुआ इस दौरान बहुत प्रताड़ना और उपासना झेलना पड़ी. 25 वर्ष से 50 वर्ष के कार्यकाल में संघ का विचार समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रसारित हुआ और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक सम वैचारिक संगठनों की स्थापना संघ के स्वयंसेवकों के माध्यम से हुई। आज 37 समवैचारिक संगठन विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। फलस्वरुप समाज में संघ विचार की स्वीकृति बड़ी है। अब शताब्दी वर्ष में संघ जैसा चाहता है वैसा समाज चलता है.
आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा संघठन..जैसा संघ चाहता है वैसे ही समाज चलता है- उमेश पाल, कदमताल कर शहर में निकले स्वयंसेवक…











