अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- नगर में पेयजल व्यवस्था की बदहाली को लेकर Telegram Times द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित समाचार का सीधा असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। गंदे नालों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइन, जल टंकियों की वर्षों से सफाई न होना और दूषित पानी की आशंकाओं को उजागर करने वाली खबर के बाद कलेक्टर प्रीति यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरीय निकायों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण मिलिंद ढोके द्वारा जिले के सभी नगरीय निकायों के सीएमओ को पत्र जारी कर स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों को शुद्ध, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। जल शुद्धिकरण संयंत्र (WTP) के फिल्टर बेड का नियमित संधारण हो तथा एलम व क्लोरीन की पर्याप्त उपलब्धता रखते हुए निर्धारित मात्रा में ही उपयोग किया जाए। निकाय क्षेत्र की सभी उच्च स्तरीय जल टंकियों की वर्ष में कम से कम दो बार सफाई अनिवार्य रूप से कराई जाए और टंकी पर सफाई की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। हैंडपंप और नलकूपों के पानी को ब्लिचिंग पाउडर या लिक्विड सोडियम हाइपोक्लोराइट से जीवाणुरहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विशेष रूप से उन पाइपलाइनों पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है, जो खुली नालियों या सीवर लाइन के पास से गुजर रही हैं, क्योंकि इन्हीं बिंदुओं को Telegram Times ने अपने पूर्व समाचार में प्रमुखता से उजागर किया था।

यदि पानी के रंग में बदलाव या दुर्गंध की शिकायत मिलती है तो तत्काल जल प्रदाय रोककर टैंकर, नलकूप या हैंडपंप जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति करने के निर्देश हैं। साथ ही, शिकायतों का 24 घंटे के भीतर निराकरण अनिवार्य किया गया है।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेयजल वितरण नलिकाओं में पाए जाने वाले सभी लीकेज 24 घंटे में दुरुस्त किए जाएं। पेयजल में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की नियमित जांच कराई जाए, क्योंकि इसकी मौजूदगी वाला पानी पीने योग्य नहीं होता। जल स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट, जल टंकियों से लेकर अंतिम नल कनेक्शन तक नमूने लेकर जांच कर अभिलेख संधारित किए जाएं।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी सीवरेज, नाली या किसी स्थान पर पेयजल पाइपलाइन लीकेज या टूटी हुई दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित नगरीय निकाय के सीएमओ को दें, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके और जनस्वास्थ्य को खतरे से बचाया जा सके।
गौरतलब है कि यदि Telegram Times द्वारा पेयजल व्यवस्था की पोल न खोली जाती, तो शायद यह गंभीर लापरवाही यूं ही दबे रह जाती। अब प्रशासन की सक्रियता से नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।











