अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से हुई मौतों के बाद भी आगर नगर पालिका ने कोई सबक नहीं लिया। जिला कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा जिलेभर में पेयजल व्यवस्था सुधारने, जल स्रोतों की सफाई और शुद्धिकरण के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद, नगर पालिका की घोर लापरवाही अब खुलकर सामने आ गई है।
मंगलवार को पुराना अस्पताल चौराहा स्थित ओवरहेड पानी की टंकी की जब सफाई शुरू कराई गई, तो वहां से ऐसा भयावह नजारा सामने आया जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। टंकी से बेहद बदबूदार, गहरे काले रंग का पानी निकला, जो देखने में नाले के पानी से भी ज्यादा गंदा था। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि ऐसा पानी तो जानवर भी पीने से इंकार कर दें, लेकिन यही पानी लंबे समय से नगर पालिका द्वारा शहरवासियों को पिलाया जा रहा था। टंकी से निकले पानी की हालत ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर शहरवासियों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। जिस पानी को लोग रोज़ पीने, खाना बनाने और बच्चों को पिलाने में इस्तेमाल कर रहे थे, उसकी स्थिति देखकर संक्रमण, बीमारियों और महामारी का खतरा साफ नजर आता है।

गौरतलब है कि आगर शहर में कुल 9 ओवरहेड पानी की टंकियां हैं, जिनसे पूरे शहर में जलप्रदाय किया जाता है। इनमें ईदगाह, मास्टर कॉलोनी, कंपनी गार्डन, काशीबाई स्मारक, वाटर वर्क्स के सामने, छावनी, अस्पताल चौराहा सहित कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यदि एक टंकी की यह हालत सामने आई है, तो अन्य टंकियों की स्थिति को लेकर भी लोगों में गहरी चिंता है। मामले को लेकर नगर पालिका सीएमओ कुशल सिंह डोडवे ने सफाई देते हुए कहा कि टंकियों की सफाई मंगलवार से शुरू की गई है और सबसे पहले अस्पताल चौराहा स्थित टंकी को साफ किया जा रहा है। उन्होंने माना कि इस टंकी की सफाई करीब एक वर्ष पहले कराई गई थी, हालांकि इसकी सटीक तिथि की जानकारी बाद में देने की बात कही गई है। सीएमओ ने यह भी बताया कि भोपाल से टंकी सफाई की एक्सपर्ट टीम बुलाई गई है। सभी टंकियों की प्रॉपर सफाई के साथ-साथ ब्लीचिंग, क्लोरीन और अन्य आवश्यक ट्रीटमेंट किया जाएगा, ताकि शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। आगे भी समय-समय पर यह टीम आकर सफाई कार्य करेगी। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि यदि इंदौर जैसी घटना सामने न आती, तो क्या आगर नगर पालिका इस गंभीर लापरवाही पर कभी कार्रवाई करती? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में शहरवासियों को आगे शुद्ध पानी मिल पाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।











