अरविंद दुगारिया, आगर मालवा- जिला मुख्यालय स्थित नेहरू उपवन में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के आसपास गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर न तो सफाई कराई गई, न ही प्रतिमा पर फूलमाला अर्पित की गई और न ही प्रकाश व्यवस्था की गई। यह दृश्य उस दिन देखने को मिला, जब पूरा देश संविधान और गणतंत्र के प्रति निष्ठा व्यक्त कर रहा था। इस गंभीर लापरवाही ने डॉ. अंबेडकर के अनुयायियों की भावनाओं को आहत कर दिया और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्होंने भारत को एक सशक्त, समतामूलक और न्यायपूर्ण संविधान दिया, उनका योगदान गणतंत्र की आत्मा में रचा-बसा है। समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित संविधान के माध्यम से उन्होंने देश के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने की नींव रखी। ऐसे महान चिंतक और समाज सुधारक की प्रतिमा के प्रति उपेक्षा को अनुयायियों ने संविधान के मूल्यों का अपमान बताया। घटना से आक्रोशित अंबेडकर अनुयायियों ने कोतवाली थाने के पीछे स्थित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह स्थल पर मंत्री नागर सिंह चौहान से मुलाकात कर अपनी नाराजगी दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें मंत्री से मिलने नहीं दिया गया। इससे आक्रोश और बढ़ गया और मौके पर ही विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका पर आरोप लगाया कि राष्ट्रीय पर्व पर भी संविधान निर्माता के सम्मान में आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गईं।
अनुयायियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में डॉ. अंबेडकर के सम्मान और स्मारकों की उपेक्षा दोहराई गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और नगर पालिका की जिम्मेदारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, क्योंकि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर डॉ. अंबेडकर के योगदान का सम्मान करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
गणतंत्र के शिल्पकार का अपमान! नेहरू उपवन में अंबेडकर प्रतिमा उपेक्षित, नाराज अनुयायियों का विरोध, नगर पालिका की बड़ी लापरवाही उजागर











